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यंत्रों का साबर/शाबर मंत्रों में क्या महत्व है

 

1. साबर/शाबर मन्त्रों में यंत्रों का क्या महत्व है 

बीज-मन्त्र या साबर/शाबर  युक्त अनेक प्रकार के 'यन्त्र' होते हैं । देवी-देवताओं और नौ ग्रहों आदि सभी के 'यन्त्र' पूजे या धारण किए जाते हैं । जीवन की कोई भी समस्या हो, उसके निवारण के लिए 'यन्त्रों' का प्रयोग होता है । साबर/शाबर सिद्ध मंत्रों में तन्त्र - यन्त्र'–का समन्वय है ।
कुछ 'यन्त्र' जेवर में, कुछ तिजोरी या गले (केश-बाक्स) में, कुछ पूजा की पोधी में, दीवालों में या कमरे में रखे जाते हैं । वाहनों के ऊपर भी 'यन्त्र' अंकित किए जाते हैं । इस प्रकार जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में लोग अपनी आस्था के अनुसार 'यन्त्रों' का उपयोग कर निर्माण बनते हैं और सुख-चैन से रहते हैं ।
कुछ 'यन्त्र' ताबीज में भरकर, कपड़े में बाँधकर गले में या भुजाओं में धारण किए जाते हैं । कुछ को अग्नि में जला देते हैं, तो कुछ 'यन्त्र' जल में विसर्जित किए जाते हैं । कुछ 'यन्त्रों' को आटे में मिलाकर मछलियों को खिलाया जाता है । कुछ 'यन्त्र' स्मशान या कबीस्तान में भूमि के नीचे गाड़े जाते हैं, तो कुछ अपने निवास-स्थान (घर) में ही पवित्र स्थान में निहित किए जाते हैं । 'पूजन-यन्त्र' तो पूजा के कक्ष में ही रखे जाते हैं ।
आकर्षण के 'यन्त्र' झाड़ (पेड़) पर लटकाए जाते हैं । कुछ 'यन्त्र' जल में भिगोकर उस जल को पिया जाता है । कुछ 'यन्त्र' भूत-प्रेत को बुलाने के लिए होते हैं, तो कुछ उन्हें भगाने के लिए । कोई ऐसा 'यन्त्र' नहीं, जो उपयोगी न हो । परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए, नौकरी या इण्टरव्यू में सफल होने के लिए भी 'यन्त्र' दिए जाते हैं ।  जिनसे विविध प्रकार के कार्य सम्पन्न किए जाते हैं । यन्त्र के कोष्ठकों में अंक या वीजाक्षर 'लोम' अथवा 'विलोम' क्रम से लिखे जाते हैं । इस प्रकार सरल एवं जटिल—दोनों प्रकार के 'यन्त्र' प्रचिलत हैं ।
'यन्त्रों' की आकृति विभिन्न प्रकार की होती है । आकृति का अपना रहस्य होता है । मध्य बिन्दु का विशेष महत्व माना गया
जो साधक/साधिका ऐसी विधि को अपनाता है वो सिद्ध पुरुष बन जाता है और उसके सब कार्य बैठे बैठे होने लग पढ़ते है यंत्रों की सहायता से अपने या दूसरों के मन चाहे कार्य करवा लेता है आज के लिए बस इतना ही 
                      🙏🙏जय माता दी🙏🙏

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